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वर्ष: 1, अंक 12, मई(प्रथम) 2017



गर्मी की छुटटियाँ हैं आईं

डॉ० अनिल चड्डा

संजू आओ, रंजू आओ,
अजय-विजय को ले कर आओ,
गर्मी की छुट्टियाँ हैं आईं,
सब को मिल कर खेल खिलाओ,
सुबह-सवेरे सबको उठा के,
नर्म घास पर सैर कराओ,
थोड़ा सा व्यायाम कराओ,
तन को अपने स्वस्थ बनाओ,
लेकिन नहीं घूमना लू में,
औरों को ये पाठ पढ़ाओ,
खेल-खेल कर लेकिन बच्चों,
समय न सारा व्यर्थ गवाँओ,
थोड़ा पढ़ लो, थोड़ा खेलो,
होम-वर्क भी अपना कर लो,
छुट्टियाँ खत्म होने को आती,
चिंता होम-वर्क की खाती,
इसलिये, मेरी मानो बच्चो,
काम समय पर पूरा कर लो,
तो न चिंता व्यर्थ सताये,
टीचर भी होशियार बताये,
मम्मी-पापा खुश हो जायें !
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