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वर्ष: 2, अंक 33,  मार्च(द्वितीय), 2018



घर


राजीव कुमार


कमल शर्मा एवं कमला देवी एक-दूसरे पर पूरी तरह समर्पित थे। दोनों एक-दूसरे की बात की अनदेखी नहीं कर सकते थे।

उनके किराए के मकान के आसपास कबूतर बहुत थे। उसकी बीट (गंदगी) साफ करते-करते कमला देवी पूरी तरह से थक जाती थी, सो एक दिन उन्होंने अपने पति से कहा, ‘‘कबूतर घर में सफाई रहने ही नहीं देते, तो क्यों न हम मकान बदल लें। आपका क्या कहना है?’’

कमल शर्मा जी ने कहा, ‘‘ठीक है, तुम जैसा ठीक समझो।’’

एक सप्ताह के अंदर उन्होंने अपना मकान बदल लिया।

नए मकान में बंदरों का उत्पात था। पहले ही दिन बंदरों ने शीशे के तीन-चार बरतन तोड़ दिए। बंदर बहुत तंग करने लगे तो कमला देवी ने कहा, ‘‘बंदरों से अच्छे तो कबूतर ही थे। लगता है यहां भी अपना गुजारा नहीं है।’’

कमल शर्मा जी ने कहा, ‘‘मैं तुम्हारा इशारा समझ रहा हूं। मगर बार-बार घर बदलना अच्छा भी नहीं है और आसान भी नहीं है।’’

“सिर्फ एक बार और प्लाज।’’ कमला देवी ने अनुरोध करते हुए कहा।

कमल शर्मा ने वहां से भी अपना मकान बदल लिया। नए मकान में न तो कबूतरों का खतरा था और न ही बंदरों का उत्पात। कुछ ही दिनों में उन लोगों ने महसूस किया कि मेहमान और रिश्तेदार न के बराबर आते हैं। इस कारण उनका मन उदास रहने लगा।

अंत में कमल शर्मा और कमला देवी एक-दूसरे से क्रोधित होकर कबूतर वाले मकान में ही आ गए।


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