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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



हाइकु


महेन्द्र देवांगन माटी


  (1)

प्रातः स्मरण 
गुरुदेव चरण
पुष्प अर्पण ।

  (2)

रवि निकले 
चिड़िया भी चहके
फूल महके ।

  (3)

आम बौराये
बागों को महकाये 
खुशियाँ लाये ।

  (4) 

बढ़ी गरमी 
तपती दोपहरी 
देंह झुलसे ।

  (5)

प्यासी चिड़िया 
पंख फड़फड़ाते 
पानी तलाशे ।

  (6)

कहीं न छांव 
राही चलते गाँव 
थकते पाँव ।

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