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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



निंदिया रानी आ जा री


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


  
ओ मेरी निंदिया रानी ,
चुपके से तू आ जा री ।
मीठे सपनों में खो जाऊँ ,
ऐसी नींद सुला जा री ।।1।।

खोकर मैं सपनों में सचमुच ,
नीलगगन में उड़ जाऊँ ।
तारों के संग खेल रचाकर ,
अपना रंग जमा जाऊँ ।।2।।

मेरा ऐसा सपन -सलोना ,
आकर तू सच कर जा री ।
ओ मेरी निंदिया रानी ,
चुपके से तू आ जा री ।।3।।

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