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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



अब तो पढ़ने जाना है


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


     
ध्यान लगाकर पढ़ना है ,
हमको आगे बढ़ना है ।
गाँव-गाँव में जा-जाकर ,
ज्ञान का दीप जलाना है ।।1।।

जहाँ कहीं भी मिले अंधेरा ,
उसको दूर भगाना है। 
कोई अनपढ़ न रह पाये ,
ध्यान हमें यह रखना है ।।2।।

समझे कुछ तुम पिंटू भैया ,
अब तो पढ़ने जाना है ।
ध्यान लगाकर पढ़ना है ,
हमको आगे बढ़ना है ।।3।।

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