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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 63, जून(द्वितीय), 2019

माँ के चरणों मे समर्पित दोहे

शिवेन्द्र मिश्र "शिव"

मात-पिता व्याकुल हुए,और हुए लाचार। नही आजकल हैं कहीं, बेटे श्रवण कुमार।।1 स्वास्थ्य-लाभ की कामना, करुं मै आठों याम। मिले मातु-पितु प्रेम नित, कभी न हो विश्राम।।2 लिखा स्वयं जिसने मुझे,जिससे मेरा नाम। उस मां के श्रीचरण में,अपना पावन धाम।।3 सिर हो 'मां' की गोद में, उस पर मां का हाथ। शिव को नित मिलता रहे,सुख यह "कामद्नाथ"।।4 छूकर माता के चरण,लेकर उनका प्यार। सकल विश्व वो जीत ले,कभी न होवे हार।।5 सदा हृदय पट पर मेरे, अंकित जिनका नाम।। कुशल क्षेम की कांमना, करता आठों याम।।6 खुशी जिंदगी मे मिले, फैले जगत प्रताप। माता के आशीष से, मिटे सकल संताप।।7


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