Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 39, जून(द्वितीय), 2018



हाइकु


पुष्पा मेहरा


                            
 
1.
सुबह–शाम बीत रहे हैं दिन पल–छिन में |
2.
शरद ऋतु मिलन है मधुर शीत ऋतु का |
3.
नारी –कदम जब-जब भी चेते निडर बढ़े |
4.
तपते घर रहट से घूमते विद्युत् पंखे |
5.
आग बगूला सुनसान राहों का टेसू प्रहरी |
6.
गर्म हवाएँ क्रोध की ज्वाला बन जलातीं तन |
7.
ब्रम्हमुहूर्त कर रहा कोकिल मंगल ध्वनि |
8.
अमराई में हवा खुशी से नाचे प्रीति पुरानी |
9.
भूख सताए पटरी पर बच्चा जूठन खाए |
10.
जीवित पेड़ निर्जीव पत्तियों का मोह छोड़ता |
11.
माँ है धरती निर्जीव को भी वह अंक में लेती |
12.
लू देती झोंटे धूप की गोद – झूलें आमों के गुच्छे |
13.
धूप चँदोवा ग्रीष्म ने लम्बा ताना घुटती साँसें |
14.
ग्रीष्म ताप पी सो गया आज चाँद रात अमा की |
15.
ख़्वाबों से सजी सुगंध भरी कली ताप से लुटी |
16.
तपी राहों पे प्रीत की पंखी झले गुलमोहर |
17.
आग लेकर जलाने आया जेठ भूने ज्यों भुट्टा |
18.
नीम दे छाया बट भी सहलाए धरा सिसके |
19.
प्यासे हैं कंठ धूप ने चुरा लिया जीवन धन !!
20.
ग्रीष्म सताए अंधड़ की किरचें आँखों में चुभे |
21.
तपा आकाश दरकी है धरती छाया सन्नाटा |
22.
जेठ निर्दयी सन्द-सन्द भेजता आग अपनी |

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें