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वर्ष: 2, अंक 39, जून(द्वितीय), 2018



हाइकु


अशोक बाबू माहौर


 (1)
 
आवाज नहीं 
गूँज रही है और 
मधुर स्वर।

 (2)

बर्फ पिघली 
पानी पानी हो रहा 
राह कीचड़।

 (3)

सड़क पक्की 
नंगे पाँव जलते 
जूते नहीं है।

 (4)
चोर गजब 
दीवार फोड़ भागा 
भागते लोग।

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