Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 39, जून(द्वितीय), 2018



ख़ाब हमको .दिख़ा गया कोई


योगेन्द्र कुमार निषाद


                                
ख़ाब हमको .दिख़ा गया कोई।
कर गया जिन्दगी ....अता कोई।१

मुफलिसों के शहर मे अपना भी,
है नही ........ओहद:बरा कोई।२

मैं कहीं का रहा न फिर भी तुम,
जख़्म दै जाओ फिर नया कोई।३

मुस्किलों से निकल कहा जाए ,
दर्द अपना कहे ....अज़ा कोई।४
                                        
रास्ते है मगर ........कहा जाऊँ,
मुझको गुमराह कर दिया कोई।५

सामने... बैठ ...देख ....'योगेन्द्र"
दिल हमारा ..जला दिया कोई।

अता=दान
अज़ा=उससे
ओहद:बरा=जिम्मेदार

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें