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वर्ष: 2, अंक 39, जून(द्वितीय), 2018



रेल


प्रिया देवांगन "प्रियू"


                          
छुक छुक करती आती रेल ,
छुक छुक करती जाती रेल ।
चिंटू पिंटू मोनू सोनू 
दौड़ लगाये खेले खेल ।

पटरी पर है चलती रेल ,
यात्रियों को भरती रेल ।
इस शहर से उस शहर तक ,
सबको भर ले जाती रेल ।

सौ सौ डिब्बों वाली रेल ,
कभी ना रहती खाली रेल ।
दौड़ लगाती खूब तेजी से, 
जल्दी से पहुँचाती रेल ।

साफ सुथरा अब रहती रेल ,
पंखा  एसी चलती रेल ।
कचरा फेंके जो डिब्बे में, 
उसको तो पहुँचाती जेल ।

चुन्नू मुन्नू चढ़े रेल ,
दिनभर खेले अपना खेल ।
यात्रियों का पेलम पेल ,
एक दूजे से होये मेल ।
 

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