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वर्ष: 1, अंक15, जून(द्वितीय), 2017



अनहोनी

सरिता सुराना


   " मम्मी - मम्मी ! इस बार तो हमारे यहाँ राजा भैया ही आएगा ना । मैं उसके साथ खूब खेलूंगी ।" झूमते हुए नन्ही शालू ने अपनी मम्मी के गले में अपनी सुकोमल बांहें डाल दी ।

   "आपसे ये किसने कहा बेटे ? " मम्मी ने पूछा ।"

   " वो सुबह दादी मां पापा से कह रही थी कि इस बार बहू के राजा बेटा ही होना चाहिए ।अगर फिर लङकी हुई तो उसका एबॉर्शन करवा देंगे ।मम्मी - मम्मी ये एबॉर्शन क्या होता है ? "

   " कुछ नहीं बेटा " - कहकर प्रिया ने शालू को कसकर अपनी छाती से चिपका लिया ।एक बार फिर किसी अनहोनी की आशंका से वह अन्दर तक कांप गई ।

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