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वर्ष: 1, अंक 15, जून(द्वितीय), 2017



हाइकु

अशोक बाबू


 (1)
सड़क पर
बूढ़ी औरत बैठी
परेशान है। 
 (2)
मदद कैसी
चर्चाएँ होती यहाँ 
मुँह बुझाए। 
 (3)
खामोश मन 
दुविधा झेल रहा 
तन नासूर। 
 (4)
औलाद झूठी 
माँ बाप दुखी आज 
कहाँ है चिंता। 

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