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वर्ष: 1, अंक 15, जून(द्वितीय), 2017



सात एकम सात

डॉ० अनिल चड्डा


सात एकम सात,
सात दूनी चौदह,
संयम तुम अपना,
कभी नहीं खोना ।

सात तीए इक्कीस,
सात चौके अट्ठाईस,
रखना तुम हमेशा,
फर्स्ट आने की ख्वाहिश ।

सात पंजे पैंतीस,
सात छेके ब्यालीस,
करना न चमचागिरी,
और न ही मालिश ।

सात सत्ते उनचास,
सात अट्ठे छप्पन,
करना सेवा देश की,
तोड़ के सारे बंधन । 

सात नामे त्रेसठ,
सात दस्से सत्तर,
हिंदू,सिख, इसाई, मुस्लिम,
सारे ही हैं ब्रदर ।
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