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वर्ष: 1, अंक 15, जून(द्वितीय), 2017



पाँच एकम पाँच

डॉ० अनिल चड्डा


पाँच एकम पाँच,
पाँच दूनी दस,
अपनी बातों में सदा,
घोल के रखना रस ।

पाँच तीए पंद्रह,
पाँच चौके बीस,
रखना अच्छी आदतें ,
लेना अच्छी सीख ।

पाँच पंजे पच्चीस,
पाँच छेके तीस,
लालच तुम करना नहीं,
रखो दूर बुरी चीज ।

पाँच सत्ते पैंतीस,
पाँच अट्ठे चालीस,
राहों में बोना नहीं,
काँटों के तुम बीज ।

पाँच नामें पैंतालीस,
पाँच दस्से पचास,
करना काम लगन से 
खोना मत विश्वास ।
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