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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 86, जून(प्रथम), 2020

सार्थक जन्म

विभा रश्मि

"कौन आनेवाला है ? "

" मेहमान हैं ।"

"क्या अपने साथ लाए हो तीर्थ से ? "

"यही समझो , वकील भी आएगा ।"

"क्यों ?" पत्नी ने प्रश्न ठोका ‌

" बताता हूँ , पहले पानी और एक कप चाय दे दो ।" पति ने कंधे का बैग और छोटा सूटकेस कमरे के कोने में रखते हुए कहा ।"

"भगवान की दया से हमारे एक बेटी है , किसी अनाथ बच्चे को तो ले आए हो क्या ? " पत्नी‌ ने पति के नेत्रों में अविश्वास से झांका ।

" हाँ , तुम्हारी एक बेटे की तमन्ना थी ... कहीं बेटा तो नहीं गोद ले लिया किसी अनाथालय से ? " पत्नी ने हैरानी जतलाई ।

"नहीं , ऐसा नहीं है ।"

"अभी कहाँ है वो ? "

"अस्पताल में रूटीन चैक अप के लिए भर्ती करके आया हूं , नहाकर उधर निकलूंगा ।"

पत्नी की उत्सुकता चरम पर पहुंच गई थी ।

" मुझे अपने माता - पिता की कोई स्मृति नहीं । सुनो !मैंने... माँ - बाप गोद लिये हैं । "

" हे भगवान ! ऐसा कभी नहीं सुना , न देखा ।"

" क्यों ?बूढ़े माँ - बाप केवल बेकदरी करने और त्यागने के लिये हैं ? क्या अपनाए नहीं जा सकते ?

"सुनो , मैं एक त्यक्त ... माँ - बाप को कानूनन गोद लूंगा... तुम्हें कोई आपत्ती तो नहीं ।"

"ऐसा कभी हुआ नहीं , परंतु ... ।"


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