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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 86, जून(प्रथम), 2020

कोरोना झाड़ने वाले बाबा

आशीष श्रीवास्तव

‘‘कोरोना झाड़ने वाले बाबा मिल गए हैं, जो कोरोना वायरस का झाड़ कर इलाज कर रहे हैं।’’ मोबाइल पर इस प्रकार का मधु द्वारा फारवर्ड किया गया मैसेज पढ़ा तो क्षमा ने तत्काल कुछ लिखने के जगह सीधे मधु को ही फोन लगा दिया: ‘‘ये क्या है मधु? इस प्रकार के मैसेज सही नहीं। अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बगैर सोचे-समझे कुछ भी फारवर्ड कर दिया।’’

दूसरी ओर से मधु ने कहा: ‘‘हां, दीदी! पर शायद किसी को मदद मिल जाए इसी भाव से मैसेज पर मैसेज फारवर्ड कर रही थी, उन्हीं में ये भी सेंट हो गया। सॉरी, अभी डिलीट कर देती हूंॅ।’’

क्षमा: ‘‘भले मेरे टोकने का तुमको बुरा लग जाए पर मैंने तुम्हें पर्सनल फोन करके इसलिए बताया कि मधु कि मदद करना ही है तो सही जानकारी वाला मैसेज कर। इस प्रकार के मैसेज तो भ्रम पैदा करते हैं। कुछ बचाव वाले, कुछ प्रेरणा देने वाले’’

मधु: ‘‘जी, दीदी, थैंक्यू! समझ गई। हम सही जानकारी, जागरूकता और सतर्कता से ही तो कोरोना जैसी महामारी से निपट सकते हैं। आगे से ध्यान रखूंगी।’’ मधु ने कहा: न केवल मैंं इस प्रकार के मैसेज रोकूंगी, बल्कि औरों को भी यही सलाह दूंगी कि वे फेंक न्यूज से बचें।


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