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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 86, जून(प्रथम), 2020

चुभन

अंकित भोई 'अद्वितीय'

सुबह के 8 बजे होंगे,धूप तेज नहीं हुई थी। हॉकर समाचार पत्र फेंक कर चला गया था। जब मैंने पोर्च से गेट तक नंगे पांव 10-12 कदम की दूरी लांघी तो पैरों में बहुत चुभन हुई (सुबह 8 बजे की धूप कितनी तेज होती है, यह सभी को पता है)। जैसे ही समाचार पत्र उठाया उसमें एक महिला के पैरों की तस्वीर थी, जिसमें दर्द भरे घाव और फोड़े देख कर मेरी रूह कांप उठी। मैं उसी रास्ते से 10-12 कदम चल कर गेट से पोर्च तक वापस आया। इस बार बिलकुल भी चुभन महसूस नहीं हुई। शायद उस महिला ने सजीव होकर मेरे दर्द को आत्मसात कर लिया था।


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