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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 86, जून(प्रथम), 2020

बेवफा

महेन्द्र देवांगन माटी

कसमें वादे तोड़ कर, हुई बेवफा यार। चली गई अब दूर वह, करके आँखे चार।। समझा था हमने तुझे , देगी पक्का साथ। बीच राह में ही हमें, छुड़ा गई तू हाथ।। झूठा था इजहार भी, दिया तुने जो फूल। चुभ रहा बनकर वही , आज ह्रदय में शूल ।। याद करे दिन रात हम, तू क्या जाने दर्द । आँसू बहते आँख में, गर्मी हो या सर्द ।। प्यार कभी करना नहीं, पकड़ो अब ये कान। बर्बादी ही जान लो , *माटी* तू भी मान ।।

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