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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 86, जून(प्रथम), 2020

रोटी

महेन्द्र देवांगन माटी

रोटी खातिर आज सब , दौड़ रहे हैं लोग । कोई तड़पे भूख से, कोई छप्पन भोग।। देख धरा के हाल को, क्या होगा भगवान । भूख मिटाने आदमी, बन बैठा शैतान ।। काम करो सब प्रेम से, तभी बनेगी बात। कड़वाहट जो घोल दे, वो खायेगा लात।। धरती माता को कभी, मत बाँटो इंसान । अन्न उगाओ खेत में, तभी बचेगी जान।। माटी के सब पूत हैं, कर लो ऐसे काम। याद करे सब आदमी, रहे जगत में नाम।।

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