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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



प्यार आजकल


विनीता तिवारी


 
रंगीन ज़िंदगी है
आज़ाद दिल की राहें
मदहोश है ज़माना
बाँहों मे डाले बाँहें 
कोई मिल गया 
फिर खो गया
कभी प्यार 
थोड़ा सा हो गया
कभी बातों मे 
मुलाक़ातों में
सीली, नशीली रातों में
मासूम था दिल, खो गया
उनसे मिलि सौग़ातों में
हीरे मिले, मोती मिले
महफ़िल जवाँ होती मिले
एक आस थी, जो ख़ास थी
वो न मिली, उनकी गली
और न मिली पनाहें
रंगीन ज़िन्दगी है
आज़ाद दिल की राहें …
    

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