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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



माँ


सुशील शर्मा


                                                                                                          
कैसे कैसे मंजर नजर आते हैं।
जाने क्यों लोग माँ को छोड़ जाते हैं।

सारी दुनिया की बातें याद रहती हैं
कैसे लोग माँ को भूल जाते हैं।

तेरी सूरत में ईश्वर दिखाई देता है
देवता भी तुझे सर झुकाते हैं।

मेरे गाल पर तेरा हर एक बोसा
तेरी गोद में हम जन्नत पाते हैं।

तेरे परोसे बिना पेट नही भरता
यूँ तो हरदिन बहुत अच्छा खाते हैं।

हर खुशी में तू बहुत दूर होती है
हर गम में तुझे पास पाते हैं।

मेरे बचपन के सारे शैतानी चेहरे
तेरे चेहरे पर हरदम नजर आते हैं।

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