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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



एहसास


शम्भु प्रसाद भट्ट"स्नेहिल"


                 
गुजरते वक्त का एहसास 
क्षण क्षण व्यतीत होते
जीवन का एहसास 

अपनों से मिलने का एहसास 
मिल कर फिर
बिछुड़ जाने का एहसास 

सुखी जीवन का एहसास 
सुख के बाद 
दुःख मिलने का एहसास 

सम्मान प्राप्ति का एहसास 
फिर अपमानित 
होने का भी एहसास 

सांसारिक माया का एहसास
घटती हुई हर एक
घटना का होता एहसास 

फिर 
जीवन जीने का एहसास 
सत्यता यही कि•••
यह जीवन ही है असली एहसास।।

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