Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



नहीं भूल पाता हूँ


राजेश भंडारी “बाबु”


                 
नहीं भूल पता हूँ आज भी वो गाँव की बातें,
वो ठंडी हवाए और वो लम्बी घनी काली रातें,
लालटेन की रौशनी चोपाल पर बातें ही बातें,
वो तालाब में नहाना और वो झम झम बरसातें ,
गाँव में सारा गाँवनिभाता आपसी रिश्ते नाते ,
एक मौत पर गाँव में नहीं किसी के जलते चूल्हे, 
शहर में पडोसी की मोत पर नहीं रूकती बारातें,
गाँव में वो सावन के झूले सब झूलने जाते ,
वो लडकियों के आंधी में उड़ते जाते छाते ,
सावन के झूलों पे झूलती लहराती लडकियाँ,
और उनको झूले देते लडके इठलाते ,
वो मारा मारी और खाते घूंसे और लातें ,
नहीं भूल पता हूँ आज भी वो गाँव की बातें |

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें