Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



आओ ! मेरे गाँव चलो


कवि जसवंत लाल खटीक


   
आओ ! मेरे गाँव चलो ,
गाँव का जीवन, बताता हूँ ।
हरी-भरी, पहाड़ियों के बीच ,
बहुत ही , सुकून पाता हूँ ।।
सुबह सवेरे ,जल्दी उठकर ,
खेतों की सैर, कर आता हूँ ।
कुँए के नीर से , नहाकर ,
आनंदमय , हो जाता हूँ ।।
गाँव की, पुरानी बावड़ी से ,
ठंडा जल, ले आता हूँ ।
कच्ची सड़को, के ऊपर ,
सरपट , दौड़ लगाता हूँ ।।
दिन को, तपती धुप में ,
नीम की छांव, में  सो जाता हूँ ।
शाम को, बड़े बुजुर्गों संग ,
चाय की चुस्की , लगाता हूँ ।।
मेहनत करके ,पेट भरते ,
इज्जत की रोटी , खाता हूँ ।
गाँव की , छोटी सी कुटिया में ,
जीवन बसर , कर जाता हूँ ।।
मिलझुल कर,  हम रहते गाँव में ,
अपने-पराये ,का फर्क नही होता ।
सुख-दुःख में , सब साथ निभाते ,
दुःख-दर्द ,का अहसास नही होता ।।
गाँव के सब ,लोगो से ,
प्रेम का रिश्ता, निभाता  हूँ  ।
गाँव है, " जसवंत " को प्यारा ,
गाँव की महिमा , गाता हूँ ।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें