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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



भोजपुरी कविता -
बात मानी राजा जी


जनकदेव जनक


   
किरखी माई के
पूजा करीं
सब दुख भाग जाई,
नोकरी कहवां मिलत बा!
दुलुम भईल बेवसाई
बात मानी राजा जी
समय जन गंवाई।
पोथी पढ़-पढ़
देह मोला भईल
नजर गईल पथराई,
साल दर साल
देवता पितर के
कबले गोहराईब
कहल मानी राजा जी
बचकुचन मत कराई।
हम बेचब
आपन गहना-गुड़िया
खेत जरपेशगी धराई,
ग्रामीण बैंक से
लोन ले लीं
ट्रेक्टर नया किनाई
बात मानी राजा जी
जी मत घबराई।
लद गईल
जमाना
जोड़ा बैलन के
अब चास पर चास
ट्रेक्टर से जोताई,
बिलॉक से आई
हाईब्रीड बीज
ऑर्गेंनिक खाद छिटाई
मान जाई राजा जी
फसल खूब लहलहाई।
चिमनी भट्ठा से
ट्रेक्टर के डाला पर
लोग के घरे-घरे
ईटा ढोवाई,
खेत से खरिहान तक
मकई के बाल
जव आ गेहूं के बोझा
थ्रेसर में डाल के
दौनी करावल जाई
मत कोहनाई राजा जी
अन्न धन से घर भरजाई।

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