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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



पाखी के लिए दो कविताएँ


भास्कर चौधुरी


 

एक
हमारी बेटी चीखती है नींद में लात मारती है हवा में वह जाने किस दुश्मन से बदला लेती है
दो
बेटी ने कहा - माँ तुम्हारे चार हाथ क्यों नहीं हैं दो हाथ काम करने के लिए और दो मुझे गोद लेने के लिए खिलाने के लिए प्यार करने के लिए !

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