Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



इंसानियत


अभिषेक कान्त पाण्डेय


 
इंसान ने कहा कि मैं न्याय हूं

इसान ने कहा कि मै अन्याय हूं ।

अंत में इंसान ने कहा कि आज किसी में इंसानियत नहीें ।

उधर ये सुनकर सभी पालतू जानवर

गाय, कुत्ता, बिल्ली, बकरी

इंसानों पर हंस रहे थे।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें