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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



दिल तेरा माँग क्या लिया मैंने


शुचि भवि


 
दिल  तेरा माँग क्या  लिया  मैंने
चैन   अपना  गँवा   लिया   मैंने

रूह  से  रूह  को  तो  राहत  है
फ़ोन  उसको मिला  लिया  मैंने

साथ  जिसके सुकून मिलता है
सिलसिला वो बना  लिया  मैंने

देख  आँखों में शर्म उसके फिर
सर   अपना  झुका  लिया  मैंने

आप   मुझको  सदा  ही  चाहेंगे
ख़ुद ही ख़ुद को बता लिया मैंने

बाद मुद्दत उसे  मिली जो 'भवि'
आज  एहसां  जता  लिया  मैंने    

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