Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



राग लिख रहा हूँ


डॉ डी एम मिश्र


   
प्राणों में ताप भर दे वो राग लिख रहा हूँ
मैं प्यार के सरोवर में आग लिख रहा हूँ।

मेरी जो बेबसी है, उस बेबसी को समझो
उजडे़ हुए चमन को मैं बाग लिख रहा हूँ।

दामन पे मेरे जाने कितने  लहू के छींटे
धोया न जा सके जो वो दाग लिख रहा हूँ।

दुनिया है मेरी कितनी ये तो नहीं पता, पर
धरती है मेरी जितनी वो भाग लिख रहा हूँ।

कितने अमीर होंगे दस बीस फ़ीसदी बस
कमज़ोर आदमी का मैं त्याग लिख रहा हूँ।

सब लोग मैल अपनी मल - मल के धो रहे हैं
असहाय साबुनों का मैं झाग लिख रहा हूँ।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें