Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक14, जून(प्रथम), 2017



अद्भुत – अतुलनीय – संग्रहणीय अंक

डॉ. रानू मुखर्जी


   अत्यंत महत्वपूर्ण प्रभावशाली सार्थक संपादकीय ! रहस्य अपराध के प्रति एक समुचित संपूर्ण गंभीर – “ भणइ हंसा शेष सुमन भर….” वैसे तो रहस्य – अपराधका जगत ही रोचक और रोमांच से भरा होता है पर इसका भी एक जीवंत इतिहास है इसे यह संपादकीय पुष्ट करता है ! संपादकजी का कथन “ मंशा यही कि हिन्दी मे भी कुछ बातें पैदा की जाएं जो की पश्चिम की विपुल, सामग्री का भी अतिक्रमण कर जाए या कम से कम उसके सामने प्रश्नचिन्ह सा खडा हो जाय !” – बहुत कुछ और बहुत दूर एक सोचने पर मजबुर कर देती है ! डिटेक्टिव फिक्शन के भेद, दुनिया का सबसे बडा रहस्य मनुष्य का मगज ही है….यह अंक हिन्दी रचनाधारा की उन गुमशुदा विविधताओं को समर्पित है, उसके तहत क्राइम फिक्शन , जासूसी कथाएं आदि आत्मसंतोषी है ! रोमांचक तत्थ्यपूर्ण संपादकीय के लिए आभार !

  कहानी खंड के अर्न्तगत एक से बढकर एक रोचक और लोमहर्षक कथाएं ! मानवमन की भावनाओं की गुत्थियों को सुलझाती पाठक को कथा के अंततक अपने आगोश मे जकडकर रखती कहानियां बार बार पढने को मजबूर कर देती है ! जयश्री रायजी ने “कहानी की तलाश में…” इतनी सिद्दत से लिखी है कि कहानी का अंत एक जबरदस्त धक्का दे जाता है और वन्या का भोला चहेरा बहुत समय तक नजर के सामने डोलता रहा ! जंगल का सुन्दर वर्णन !

  “कोमा” कहानी कंपकंपा देनेवाली है ! संपादकजी ने सही कहा था “मनुष्यताने दो चीजें खो दी – विवेक और गौरव” एकदम सही है ! कोमा कहानी इसे पुष्ट करती है !

  “मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस” बडी सतर्कता से बुनी कहानी है ! मर्डर हे या धोखा ? पढते हुए गुनतें हुए दन्द में पड गई !

  निर्मला तोदी जी ने एक मार्मीक और अद्भुत जाल बिछाया है ! छटपटा गया मन ! बधाई ! सभी कहानियां एक से बढकर एक है ! अपनी अनुठी विशेषताए लिए हुए ! संजीव, मुशर्र्फ आलम जौकी, अवधेश प्रित, हरनोट, पंकज, जवाहर, विवेक, रंणेन्द्र, पंकज मिश्रा, विजय कुंमार, की कहानियां अंत तक रहस्य बनाए रखती है !

  अनुदित कहानी खंड की कहानियां भी विषयानुरुप रहस्य – रोमांच की श्रेष्ठ कथाएं है ! रवीन्द्रनाथ, मोपांसां कमला दास, रत्नाकर आदि श्रेष्ठ कलाकारों की रचनाएं अपने आप में श्रेष्ठ है !

  अनुदित कहानी खंड में रवीन्द्रनाथ ठाकुर, मोपांसा, आदि कहानियां विशेष तो है ही !उनके अनुवाद कला का भी अलग वैशीष्ट है ! “दस्तक आधी रात” तथा “राजपुतानी” की कहानी जैसे जैसे आगे बढती है मन की उत्तेजना और चंचलता अस्थिर कर देती है ! “केकडा” “अंतिम अतिथि” और “सदानंद की राह” एक एëसी उल्झी गुत्थी है जिसको सुलझाने की चाह पाठक को अंत तक उलझाए रखती है ! संपादक जी के शब्दो में कहें तो एक “भुतैली परिस्थिति” से गुजरने तक की अनुभूति होनेवाली कथा है !

  अक्सर हम खोज छांटकर एëसी रचनाएं तो पढते नहीं अतः यह अंक इसलिए भी विशेष बन जाता है ! एक अद्भुत अनुभूति जगानेवाला अंक !

  प्रलेख खंड के अन्तर्गत गोपालदास गहमरी के संस्मरण ने अंक को एक नई दिशा दी है ! “लंगडे की सैर” अंक की विशिष्ट उपलब्धि रही !

  आलेख खंड और परिचर्चा के अन्तर्गत अनेक भावों और विचारों से अवगत होना हुआ सभीने अपने भावों को अपने तरीके से व्यक्त किय है जिससे रहस्य – अपराध के संसार को अलग से देखना हुआ ! मन भाव विह्वल और भावनाओ के उफान से भरा है पर कुछ हद तक मेरे पास शब्दों का अभाव है बांग्ला जासूसी साहित्य गुजराती साहित्य में रहस्य कथा और उत्कल की माटी मे डिटेक्टीव लेख ने उक्त भाषाओं मे रचे गए रहस्य कथाओं को बडे सुन्दर रुप में प्रस्तुत किया है ! बहुत कुछ जानने समझने को मिला !

  सच में कहा जाय तो अंक जितने दिनों तक चटकारे ले कर पढा जाएगा उतना ही आनन्द देगा !

  हंस की पूरी टिम, संपादक, अतिथि संपादक तथा लेखक मंडल को इतने भव्य अंक के प्रकाशन के लिए बधाई

www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें