Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक14, जून(प्रथम), 2017



भाग्यशाली

सुशील शर्मा


   सिद्धार्थ और सिद्धान्त दोनों बहुत परम मित्र एक ही कक्षा के विद्यार्थी थे।किन्तु एक पढ़ाई में बहुत मेधावी पुस्तक का कीड़ा दूसरा चित्रकारी में माहिर लेकिन पढ़ाई में फिस्सडी।

  आज 12th का रिजल्ट घोषित हुआ था।सिद्धार्थ ने जिले की मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।परिवार शिक्षक मीडिया सब मे सिद्धार्थ छाया था।सब उसका गुणगान कर रहे थे। बेचारे सिद्धान्त को कोई नही पूछ रहा था।चुपचाप नदी के किनारे एक पत्थर पर बैठा बहते पानी को देख रहा था। सिद्धार्थ ने पीछे से जाकर सिद्धान्त को जोर से भींच लिया।

  जैसे ही सिद्धार्थ ने सिद्धान्त का चेहरा देखा तो चौक पड़ा। सिद्धान्त का चेहरा आंसुओं से तर था।

  "दोस्त बहुत बधाई तुम मेरिट में आये हो"सिद्धान्त ने हँसने की कोशिश की। सिद्धार्थ भांप गया कि सिद्धान्त अपने परीक्षा परिणाम के कारण बहुत दुखी है। उसने सिद्धान्त के आंसू पोंछते हुए कहा"सिद्धान्त तुम मुझसे हमेशा आगे रहोगे तुम मेहनत करके मुझ से भी अच्छे नम्बर ला सकते हो किन्तु मैं कुछ भी करलूँ तुम्हारे जैसी चित्रकारी कभी नही कर सकता दोस्त।"

  पढ़ाई मेहनत से की जा सकती है रट कर अच्छे नंबर भी लाये जा सकते हैं किन्तु दोस्त ईश्वरीय प्रदत्त कलाएं सिर्फ भाग्यशाली लोंगो को ही मिलती हैं।और मैं तुम्हारे जैसा भाग्यशाली नही हूँ।"

  सिद्धार्थ की बात सुनकर सिद्धान्त ने उसे जोर से गले लगा लिया।

www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें