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वर्ष: 1, अंक14, जून(प्रथम), 2017



सब कुछ ठीक ठाक है

डॉ० कामिनी कामायनी


   मंत्री जी का प्रेस कान्फ्रेंस चल रहा था । राज्य के सर्वोच्च पदाधिकारी गण मंत्रीजी के साथ जड़े की गुनगुनी धूप में मखमली गद्देदार कुर्सियों पर लौन में बैठ कर गरमगरम चिकन सूप पी रहे थे ।

  राज्य के बाहर से आए पत्रकारों ने प्रश्न पूछे “ आप की सरकार का एक साल का उपलब्धि क्या है?” “ उपलब्धि? अरे भाई ,हमारे शासन काल की सर्वोपरि उपलब्धि यही है कि इस दौरान राज्य में एक भी अप्रिय घटना,हिंसा ,दंगा ,लूटपाट,मारपीट ,बलात्कार आदि नहीं हुई। पुलिस कमिश्नर यहीं बैठे हुए हैं ,पूछ लीजिए इन्हीं से”। फिर खुद ही उनकी ओर मुखातिब होकर बोले , “ क्या हरण जी ,एक भी अप्रिय घटना घटी है ?’तत्परता से कुर्सी से उठते हुए श्री हरण जी ने जवाब दिया , “ नो सर ,एक भी एफ आर आई दर्ज नहीं हुआ है”। “मगर ....” पत्रकार को ताज्जुब हुआ , “ मगर सर ,आपके राज्य में चारों तरफ नरकंकाल बिखरे पड़े हुए हैं । पशुओं और मनुष्यों की संख्या गिनना भी करना मुश्किल हो रहा है, महिलाएं हृदय विदारक स्वर में आलाप कर रही हैं छोटे छोटे शिशु ....”। मंत्री जी का पारा मगज पर चढ़ गया । तैश में आकर लगभग डांटते हुए पत्रकार पर झपटे , “ अब क्या क्या पूछेंगे , हड्डी का क्या है ! चील कौवे गिद्ध किन्ही पड़ोसी राज्यों से लाकर ऊपर से गिरा देते हैं , उन्हें तो विपक्षी दलों ने अपना पालतू बना रखा है । बाकी अंट संट बंद कीजिए वरना हम भी आदमी का मुंह बंद करना जानते हैं”। फिर माईक पकड़ कर जनता की ओर उन्मुख हुए ।“ आप ही बताएं इन सिर फिरे पत्रकार को ,कि राज्य में कितनी शांति है’।

  श्री हरण जी उनके बगलामुखी ईशारे पर एक जनताजनार्दन जी को मंच पर प्रस्तुत किया ,जिसका सर्वस्व काँप रहा था , भूख से ,बीमारी से ,ठंढ से ,भय से ,पता नहीं किसी चीज से ,शायद सब चीज से । रो रो कर धुंधली हुई उसकी आँखें ,दूर से भी रोशनी विहीन लग रही थी । जीते जागते उस नरकंकाल ने कहा था , “ मंत्री जी सही फरमाते हैं । राज्य में सब कुछ ठीक ठाक है”।

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