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वर्ष: 1, अंक14, जून(प्रथम), 2017



"मुझे दूसरे के घर जाना है न"

राजेश श्रीवास्तव


   अपने मित्र सोहन के साथ उसके बहन के घर पहुँचा / सोहन की बहन रेखा की शादी शहर से ४० किलोमीटर दूर एक गांव में हुई थी / सोहन और हम एक दूसरे के गहरे मित्र थे / हमें देखकर पता ही नहीं चलता की हमलोग मित्र है या सगे भाई / रेखा भी मुझे अपने छोटे भाई जैसा प्यार देती / रक्षा बंधन हो या भैया दूज सबमें वह मुझे और सोहन को बराबर का दर्जा देती थी / उसकी शादी हुए ८ साल हो गए थे / दो-दो बच्चे भी हो चुके थे / एक बड़ी बेटी जो लगभग ६ वर्ष की थी और छोटा बेटा चार साल का / वह जब भी मायके आती तो मेरे यहाँ जरूर आती और मुझे भी अपने ससुराल आने के लिए आमंत्रित करती / लेकिन मैं एक बार भी उसके घर नहीं जा पाया था / इस बार जब मैं छुट्टी पर था तब सोहन ने मुझे रेखा के ससुराल जाने का प्रस्ताव रखा / मैंने उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया / पहली बार मैं उसके ससुराल जा रहा था / मैंने रेखा के लिए एक साड़ी तथा बच्चों के लिए मिठाइयां और कुछ चॉकलेट ले ली / उसकी बेटी मिठाइयों की बड़ी शौक़ीन थी / बेटा को चॉकलेट पसंद था / मुझे दोनों के पसंद मालूम थे इसलिए मैंने दोनों के पसंद का ध्यान रखा / हमलोगों को अपने घरपर आया देखकर रेखा बहुत खुश थी / उसकी बेटी ने जब

  सूना की मैं आया हूँ तो वो मामा-मामा कहती हुई आकर मुझसे लिपट गई / उसका बेटा शर्मीले स्वभाव का था / वह अपने माँ के गोद से नज़रें झुकाकर मुझे देखने का प्रयास कर रहा था / मैंने उसे पुचकारना चाहा तो वह मुझसे छुड़ाकर अपनी माँ से और जोरो से लिपट गया / रेखा हमलोगों को बैठकखाने में बैठाकर बच्चे को लेकर अंदर चली गई / बेटी अभी भी मेरे पास थी / वह बहुत ही खुश थी / मैंने मिठाई का पैकेट खोलकर उसकी ओर आगे बढ़ाते हुए कहा -

  " ये लो तुम्हारे पसंद की मिठाइयां " /

  वह ख़ुशी से मचल उठी / पुरे पैकेट को लेकर अंदर दौड़ते हुए चली गई /

  सोहन बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चला गया / थोड़ी ही देर में रेखा की बेटी मेरे पास आई /

  मैंने उससे पूछा -" मिठाइयां कैसी थी ?"

  उसने जबाब दिया "अभी मैंने नहीं खाया / "

  " क्यों ! तुम्हे तो मिठाइयां बहुत पसंद है न ?"

  " हाँ वो तो है / लेकिन अभी तो बाबू को दे दिया है / बाद में खा लुंगी /

  " बाबु के लिए तो मैं चॉकलेट लाया हूँ / उसे चॉकलेट पसंद है इसलिए /"

  " तो क्या हुआ / उसे मिठाई भी पसंद है /"

  " मिठाइयां तो बहुत सारी है / तुम भी उसमे से कुछ खा लो /"

  " नहीं पहले वो खायेगा फिर बचेगा तो ही मैं खाऊँगी /"

  " ऐसा क्यों ? "

  " वो तो लड़का है न / "

  उसका जबाब सुनकर मैं आश्चर्यचकित था /

  " लड़का है तो क्या हुआ ?"

  " दादी मां कहती है / उसे बड़ा होकर काम करने के लिए बाहर जाना होगा / उसे बहुत ताकत की जरुरत पड़ेगी / इसलिए उसे ज्यादा ज्यादा खाना चाहिए /'

  " और तुम ?"

  " मैं तो लड़की हूँ न / मुझे तो घर में ही रहना है / घर का काम करना है तो मैं कम भी खाऊँगी तो चल जाएगा / इसलिए जो भी चीज घर में आता है उसे पहले बाबु को दिया जाता है वह खाकर छोड़ता है तब मैं खाती हूँ /"

  "और वह पूरा खा गया तो ?"

  " मुझे नहीं मिलता / "

  " तो तुम अपने लिए जिद नहीं करती /'

  " नहीं हमें जिद्दी नहीं बनना चाहिए / जो घर में मिले या बचे उसी से अपना काम चलाना चाहिए / नहीं तो आगे चलकर बहुत दिक्कत होगी /'

  " तुझे दिक्कत होगी और बाबू को क्यों नहीं ?"

  फिर उसने शरमाते हुए कहा '

  " मुझे दूसरे के घर जाना है न / बाबु तो इसी घर में रहेगा / "

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