Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 14, जून(प्रथम), 2017



हाइकु

सुशील शर्मा


  (1)
तुम्हारी यादें
तपी दुपहरी में
स्निग्ध छाया सी।

  (2)
जाड़े का सूरज
धूप की छाया तले
ठिठुरता सा।

  (3)
मन अंतस
प्राणों का विचलन
ढूढ़ता छाया।

  (4)
शीतल छाया
माँ का प्यारा आँचल
मन को भाया।

  (5)
अकेला साया
जाना पहचाना सा
तनहा चला।

  (6)
खामोश रात
सन्नाटों की आवाज़
तेरा आना सा।

  (7)
दर्पण बिम्ब
मन का प्रतिबिंब
सच कहता।

  (8)
मन के भाव
धूप और छाया से
बदलें रंग।

(9)
स्वप्न सुरीले
तुम्हारी स्निग्ध स्मृति
मन के बिम्ब।

  (10)
तेरा सा साया
विचारों की धुंध में
प्रतिबिम्बित।
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें