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वर्ष: 1, अंक 14, जून(प्रथम), 2017



लोक गीत-
"मिलने आओ शामलिया "


गुलाब चंद पटेल


हवा चली बादल ने ली अंगड़ाई, 
गोकुल में नाचे मोर, 
मिलने आओ सुंदर  शामलिया, 
आप मिलने न आए क्यो? 
नहीं आएंगे तो नंदजी की सौगंध, मिलने.... 

आप गोकुल में गौआ चराते, 
आप ही हे माखन चोर, 
आप काली कंबल वाले, 
आप चरवाहा के हो नाती, मिलने.... 

आप व्रज में बांसुरी बजाते, 
आप गोपीओके दिल के चोर, मिलने..... 
आप गुलाब नरसिंह के स्वामी शामलिया, 
हमे गोदी लेकर खेलाया रास, मिलने..... 
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