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वर्ष: 1, अंक 14, जून(प्रथम), 2017



वक्त पर दोहे

सुशील शर्मा


वक्त कसौटी पर कसके ,कुंदन देय बनाय।
वक्त न किसी को छोड़ता सब को देय नचाय।

समय बड़ा बलवान है ,वक्त से बड़ा न कोय।
भीलन लूटी गोपिका, अर्जुन बैठा रोय।

समय कभी सोता नही ,हरदम है तैयार।
कर्म अगर सोता रहे ,पड़े समय की मार।

समय कभी खोटा नही, खोटे कर्म हमार।
फिरें भाग्य को कोसते, कर्म न करें विचार।

अहंकार की धौंस में वक्त को भूले आप।
एक दिन ऐसा आएगा बरसेंगे सब पाप।


वक्त का न्यायाधीश जब, करे न्याय का मान।
का राजा का रंक हों, सब लगें एक समान।

वक्त की कीमत जो करे वक्त पर करके काम।
जीवन सफल बनाइये भला करेंगे राम।

बुरा समय गर पास है धीरज हिय में राख।
मन संतोष विचारिये बात टके की लाख।
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