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वर्ष: 1, अंक 14, जून(प्रथम), 2017



दो एकम दो

डॉ०अनिल चड्डा

(1)
दो एकम दो
दो एकम दो
दो दूनी चार
जल्दी से आ जाता
फिर से सोमवार ।

दो तीए छ:
दो चौके आठ
याद करो अच्छे से
अपना- अपना पाठ ।

दो पंजे दस
दो छेके बारह
आओ मिल कर बने
एक और एक ग्यारह  ।



दो सत्ते चौदह
दो अटठे सोलह,
जिद नहीं करना
बेकार नहीं रोना ।

दो नामे अट्ठारह,
दो दस्से बीस,
करना अच्छे काम,
देंगें मात पिता आशीष ।-
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