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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 89,जुलाई(द्वितीय), 2020

सम्मान

अर्विना गहलोत

रुचि आज वुमंस डे के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह में शिरकत करने पहुंची थी । स्टेज पर एक महिला उसके द्वारा किये गए कार्यों का ब्योरा पेश कर रही थी । रुचि के मस्तिष्क के अंधेरे कौने में एक अजीब सी उथल-पुथल मची हुई थी । एक दिन अपने इगो की वजह से पति बच्चों को छोड़ दिया था । " आज जो सम्मान मिलने वाला है । " इस सम्मान को पाकर मैं खुश हूं या दुखी असमंजस की स्थिति मस्तिष्क में बनी हुई थी । "आज मेरे अपने मेरे साथ नहीं है । " स्टेज से उसके नाम की उद्घोषणा हुई । "रुचि उठी तो पेरों में कंपन महसूस हुआ धीरे-धीरे वह स्टेज की सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर पहुंच गई ।" सारा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा मंच पर सम्मान पत्र मोमेंटो दिया गया । लेकिन दिल के खाली कौने में एक अजीब सी टीस सी हुई । निगाहें अभी भी व्यर्थ ही अपनों को ढूंढ रही थी। गले में पड़ी माला निरर्थक लग रही थी । विचारों में गुम स्टेज से नीचे उतर कर जाने के लिए गेट की तरफ मुड़ी तो पति और दोनों बच्चे खड़े उसकी प्रतिक्षा कर रहे थे । रुचि की देख कर रुलाई फूट पड़ी बच्चों को गले लगा लिया पति ने धीरे से कहा रुचि घर चलो तुम्हारे बिना घर सूना पड़ा है


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