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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 65, जुलाई(द्वितीय), 2019

मेहंदी लगे हाथ

पवनेष ठकुराठी ‘पवन’

शादी के बाद पति ने दुल्हन से कहा - "मेंहदी लगे तुम्हारे हाथ कितने खूबसूरत लग रहे हैं।"

सास ने कहा- "वाह मेरी बहू के हाथों में तो लक्षमी है लक्षमी..!"

ससुर ने कहा- "बहू के हाथों में कमाल का जादू है। पूरा घर संवर जायेगा।"

कुछ समय बाद दुल्हन के पति और सास-ससुर ने दुल्हन से दहेज की मांग की। पढ़ी-लिखी समझदार दुल्हन ने साफ मना कर दिया। वह जानती थी कि लाखों की रकम उसके निर्धन पिता नहीं अदा कर पायेंगे।

एक दिन पड़ोस में उसकी सहेली की शादी थी। इसीलिए उसने अपने हाथों में मेंहदी लगा ली। घर पर पति ने उसके हाथ देखे और कहा- "मेहंदी लगे तुम्हारे हाथ कितने बदसूरत लग रहे हैं।"

सास ने कहा- "इस कुलच्छिनी के हाथों में तो लक्षमी रहती ही नहीं।"

ससुर ने अपना मुंह फेर लिया।

कुछ माह बाद अखबार में खबर छपी- "दहेज के लोभ ने ले ली प्रतिभाशाली बिटिया की जान..।"


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