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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 65, जुलाई(द्वितीय), 2019

अंधेरा

पवनेष ठकुराठी ‘पवन’

बेटे ने मां से पूछा- "माँ ! यह अंधेरा कब दूर होगा ?"

माँ ने माचिस लेकर आग जलाई और बोली- "देखो बेटा। अंधेरा और ठंड दोनों दूर हो गये। मैं तुमसे पढ़ाई करने को इसीलिए कहती हूँ। पढ़ाई आग के समान है, जो हर अंधेरे को दूर कर देती है।

"ठीक है माँ ! मैं अब मन लगाकर पढ़ाई करूँगा।" बेटे ने कहा।

माँ के चेहरे पर मुस्कुराहट थी।


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