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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 65, जुलाई(द्वितीय), 2019

राशि रत्न

आशीष श्रीवास्तव

पति-पत्नी ज्योतिष के पास पहुंचे और कहने लगे, आपने खुशहाल जीवन के जो भी उपाय बताये सब किये।

पति:- ‘‘गृहस्थ जीवन में शांति के लिए पुखराज भी पहन लिया।’’

पत्नी:- ‘‘मानसिक शांति के लिए मोती भी आपके बताये अनुसार पहन लिया।’’

‘‘पर अभी भी गृह कलह मची रहती है। कोई प्रगति नहीं।’’

ज्योतिष ने गंभीरता से दोनों की ओर ऊपर से नीचे तक देखा और कहा:- ‘‘आपको जो बाहरी नग बताये वे तो आपने पहन लिये, पर क्या आंतरिक नग भी धारण किये?’’

पति-पत्नी दोनों जिज्ञासावश एक-दूसरे को देखने के बाद ज्योतिष की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगे:-‘‘आंतरिक नग !!’’

ज्योतिष:- ‘‘हां, प्रेम, सेवा, सहनशीलता, विनम्रता, सद्भाव ऐसे गुण हैं जो राशि रत्न से भी अधिक प्रभावशाली होते हैं.........।’


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