Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक17, जुलाई(द्वितीय), 2017



बरसात


महेन्द्र देवांगन माटी


 		 
बरसात का मौसम आया ,
बादल गरजे पानी लाया ।
झम झमाझम गिरे पानी, 
पानी खेले गुड़िया रानी ।

चम चमाचम बिजली चमके, 
छोटू छुप जाये फिर डरके ।
आसमान में काले बादल ,
दिख रहे हैं जैसे काजल ।

चुन्नू मुन्नू नाव चलाये, 
दादा दादी खूब चिल्लाये ।
दोनों पानी में भीग रहे, 
आक्छी आक्छी छींक रहें ।

टर्र टर्र मेढक चिल्लाये ,
पानी को फिर से बुलाये ।
पानी गिरे झम झमाझम, 
नाचे गुड़िया छम छमाछम ।

चारों ओर  हरियाली छाई, 
खेतों में फसलें लहलहाई ।
खुश हो गये  सभी किसान ,
मिट गई चिंता की सभी निशान ।

 
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें