Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



प्रबोध कुमार गोविल के नये उपन्यास ‘‘अक़ाब’’ की समीक्षा


प्रबोध कुमार गोविल


"अक़ाब" प्रबोध कुमार गोविल का नया उपन्यास है,जो दिशा प्रकाशन दिल्ली से इसी वर्ष आया है।हर साल हिंदी के साहित्यकारों की सूची जारी करने वाले और आधा दर्ज़न उपन्यासों,इतने ही कहानी संग्रहों के लेखक प्रबोध गोविल जी से हिंदी जगत भली भाँति परिचित है।संस्मरण,लघुकथाओं आदि की अनेक पुस्तकें भी उनकी आईं हैं।

अक़ाब का अर्थ होता है,चील जो बहुत ऊंचाइयों तक उड़ती है पर दाना-पानी के लिए पृथ्वी पर आकर झपट्टा मारती है।अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की युगल अट्टालिकाओं को इसी चील झपट्टा की तर्ज़ पर हवाई जहाज़ों से आतंकवादियों ने तहस-नहस कर दिया था।इस उपन्यास का शीर्षक इसी प्रतीकात्मकता को ज़ाहिर करता है।अक़ाब की कथा इस हादसे के बाद उस समय की है,जब नया ट्रेड सेंटर बन गया है और पुराने की यादगार में दो पूल बन गए हैं,जिनपर मारे गए लोगों के प्रथम अक्षर अंकित हैं,जहाँ उनके परिजन फूल रखकर उन्हें याद करते हैं।उपन्यास का नायक तनिष्क इस हादसे में मारे गए उसके अंकल मसरू ओसले के नाम पर फूल रखता है।अमेरिका की पृष्ठिभूमि पर लिखे गए इस उपन्यास में जापान,पाकिस्तान, भारत,अफ्रीका आदि कई देश आते हैं। उपन्यास की शुरुआत हडसन नदी के सौंदर्य से होती है,जिसके एक ओर जर्सी सिटी दूसरी ओर न्यूयार्क सिटी है।इस जगह की सुषमा का वर्णन लेखक ने बड़ी शिद्दत से किया है।उपन्यास समय को रेखांकित करते हुए लेखक कहता है"अभिनेत्री साधना को गुज़रे हुए लगभग दो साल बीतने को थे।" उपन्यास का नायक तनिष्क है,जो जापान में जन्मा है लेकिन एक मिस्त्री मसरू ओसले के साथ अपनी माँ को छोड़कर अमेरिका आ जाता है।उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी और माँ भी दूसरी शादी करने वाली थी।माँ से उसे बहुत लगाव था।अमेरिका आने के बाद भी वह माँ को याद करता रहता था।माँ बचपन में उसे बहुत प्यार करती थी।मसरू ने तनिष्क को बेटे की तरह रखा था।वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हादसे में मारे जाने के बाद मसरू के वारिस को मिलने वाला भारी भरकम मुआवज़ा तनिष्क को ही मिला है।तनिष्क न्यूयार्क में रहते हुए,कई देशों की संस्कृतियों से रूबरू होता है।उसका अपना जीवन राजेश रेड्डी के शेर की तरह है-

किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ जिंदा क्यूँ नहीं होता

उपन्यास में कई मोड़ हैं।तनिष्क के बचपन के दिनों में जापान में उसके घर एक लामा गोमांग आता है,जो बताता है यदि कोई लड़की किसी लड़के की इंद्री पकड़ लेती है,तो उस लड़के का घर बस जाता है।लामा का यह कथन तनिष्क को जिंदगी में परेशान करता है।बचपन में उसकी माँ जब उसकी मालिश करती थी,तो उस आनंद को तनिष्क उम्र भर नहीं भूल पाता।माँ से जो मालिश के गुर उसे मिले, वे स्पा सेंटर की नौकरी में बहुत काम आए।उसने भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री सेलिना नंदा की निःवस्त्र मालिश की है,लेकिन आत्मसंयम नहीं खोया।उसके पास कंडोम देखकर जब अभिनेत्री नंदा कहती है,इसे काम में नहीं लिया,तब भी वह संयम नहीं खोता।उपन्यास में एक चरित्र रईस शेख अलसुलतानिया मंजूर भी है,जो तनिष्क पर स्नेह रखता है,और मदद भी करता है।बाद में इसी शेख के कहने पर तनिष्क कश्मीर आता है,जहाँ इम्पोरियम खोलता है।पर शेख के कश्मीरी मित्र से उसे ज़्यादा मदद नहीं मिलती।बाद में तनिष्क को पता चलता है,शेख भी आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है।कश्मीर में तनिष्क की भेंट नाटकीय रूप से मसरू की पत्नी से होती है,जिसे जापान छोड़कर मसरू तनिष्क के साथ अमेरिका आ गए थे।पत्नी-और परिवार के बारे में मसरू ने तनिष्क को कभी कुछ नहीं बताया।तनिष्क मसरू की सौतेली बेटी अनन्या से शादी कर लेता है,जो मसरू की पत्नी के साथ लेह में रह रही है।उपन्यास में जॉन अल्तमश और अभिनेत्री सेलिना नंदा प्रसंग बाज़ारवाद की सच्चाई बयान करता है।

उपन्यास में पताका-प्रकरियों के ज़रिए कथा-उपकथाओं का खूब ताना-बाना बुना गया है।लेखक का विदेशी अनुभव भी शिद्दत से उपन्यास में बोलता है।उपन्यास में लेखक अपनी समस्त रचनात्मकता,सामर्थ्य और संभावनाओं के साथ उपस्थित है।विदेशी पृष्ठभूमि का यह उपन्यास भारतीय एन आर आई पर केंद्रित नहीं है।इसका मुख्य सन्देश आतंकवादियों का विश्व पर कसता शिकंजा है,जिससे विश्व सावधान रहे ।इस उपन्यास के कैनवस में कोई मेले नहीं लगते,इने-गिने पात्र ही आते हैं।न आते तो बात कैसे बढ़ती आप सोचते रहते !

उपन्यास की भाषा प्रवाहमयी है।भाषा की सरलता,सहजता और सजगता देखते ही बनती है।उपन्यास को कातने, बुनने,पिरोने और टांकने में बड़ी मशक्कत की गई है लेकिन चलताऊ पाठकों के लिए बेहद रोचक नहीं लगता,जबकि यह उपन्यास बड़े सन्देश के साथ हिंदी की महत्वपूर्ण कृति है।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें