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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



टॉमी और हनी


राजीव कुमार


शीर्षक पढ़कर आप लोगों को लग रहा होगा कि टॉमी किसी कुत्ते का नाम होगा और हनी कुतिया का नाम, जोकि एक ही घर में रहते होंगे।

जी हां, दोनों एक ही घर में रहते हैं लेकिन न तो टॉमी किसी कुत्ते का नाम है और न ही हनी किसी कुतिया का नाम।

एक दिन मुझे उनके घर जाने का सुअवसर प्राप्त हो ही गया। आप लोगों की तरह मैं भी कशमकश में था। नया-नया परिचय होने के बावजूद डरते-डरते मैंने नंदनी भाभी से पूछ ही लिया, ‘‘भाभी, न तो आपके घर में कोई कुत्ता है और न तो कुतिया फिर टॉमी और हनी किनके नाम हैं?’’

नंदनी भाभी की नजर मुझ पर गढ़ी रही तो मैं सकपकाते हुए बोला, ‘‘नहीं भाभी, मैं तो ऐसे ही आपको इन नामों को आवाज लगाते हुए सुना था। अगर आप जवाब नहीं देना चाहती हैं तो रहने दीजिए। सॉरी भाभी।’’

भाभी ने पलके बिना झपकाए हुए मेरी ओर चाय का प्याला बढ़ाते हुए कहा, ‘‘दरअसल टॉमी और हनी में अपने पतिदेव के लिए इस्तेमाल करती हूं, जब उन पर खुश होती हूं तो हनी बुलाती हूं और जब गुस्सा होती हूं तो टॉमी बुलाती हूं।’’

अभी मेरा सकपकाया मन भाभी के जवाब और मेरे मन में उठ रहे प्रश्नों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर ही रहा था कि भैया आ गए। भाभी उनको गुस्से से देखते हुए पूछा, ‘‘टॉमी कर आए बिजली बिल जमा?’’

‘‘बिजली कट जाएगी तो?’’

‘‘बिजली विभाग वाले तुम्हारे रिश्तेदार हैं क्या?’’

प्रश्न सुनकर मैं और सकपका गया। भैया का चेहरा तो भयग्रस्त हो गया। भाभी की खा जाने वाली नजर उनको घूरती ही रही। मैंने चाय की अंतिम सिप ली और कमरे से बाहर निकल गया।


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