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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



वीरता दिखाएँ


शुचि 'भवि'


                                                          
हर बच्चे को जीना सिखायें
चलो हम कुछ वीरता दिखायें,,
भूले वे अपने संस्कार हैं
चलो उन्हें मर्यादा सिखायें,,
अब तक जर के पीछे दौड़े
उन्हें भी दौड़ायें हैं हम,
अब कुछ सात्विक पढ़े पढ़ायें
आओ हम कुछ वीरता दिखायें,,
कितना डर -घर कर गया यहाँ
हर दिन कोई बच्चा मर रहा यहाँ,
चलो उनको कुछ समझायें
जीवन उनमें भर भर आयें,
हम भी कुछ वीरता दिखाएँ,,
कोई पढ़ाई से डर कर भागे
किसी को छोटी उम्र प्रेम रोग लागे,
जान बिन बात ही ये हैं गंवायें,
जान उनकी की कीमत उन्हें समझायें
चलो इस क्षेत्र हम ही सब मिलकर
कुछ तो वीरता दिखाएँ,
अपने भटके बच्चे वापस पायें,
आओ हम सब वीर कहलायें

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