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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



जीवन एक गणित है


महेन्द्र देवांगन माटी


जीवन एक गणित है, इसे बनाना पड़ता है ।

कभी करते हैं जोड़ तो, कभी घटाना पड़ता है ।

चलती नहीं कभी समांतर, ऊंच नीच हो जाते हैं ।

सम विषम के खेल में, कितने आड़े आते हैं ।

कभी सुख की बिंदु पाते, तो वक्र का दुख भी होता है ।

आड़े तिरछे जीवन रेखा, अश्रु बीज फिर बोता है ।

कभी करते हैं गुणा तो, भाग भी करना पड़ता है ।

जीवन के इस गणित को, हल भी करना पड़ता है ।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें