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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



कैसा बदला


विज्ञान व्रत


                                                            
उसने  अपना  घर  क्या  बदला 
बस्ती   का   ही  नक़्शा   बदला

रोज़ाना   इक    चेहरा    बदला 
यानी   वो   फ़ैशन - सा   बदला 

उसने   अपना   लहजा   बदला 
मैंने    अपना     रस्ता     बदला 

अरसे  बाद  मिला  हूँ   ख़ुद  से 
सब  लगता  है   बदला - बदला

भूल  चुका  हूँ   दुश्मन   को  ही 
फिर  क्या  बदला  कैसा  बदला 
 

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