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वर्ष: 1, अंक16, जुलाई(प्रथम), 2017



विचारों का रहस्य

सुरंगमा यादव


   किसी ने कहा है कि, ”आपका हर विचार एक वास्तविक वस्तु-एक शक्ति है।“ हमारे जीवन में जो भी चीजें आ रही हैं, वे ऐसे ही नहीं आ रही बल्कि हम उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। वे उन तस्वीरों द्वारा हमारी ओर आकर्षित हो रही हैं, जो हमारे मस्तिष्क में हैं। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि जो हम सोच रहे हैं या हमारे दिमाग में जो कुछ चल रहा है वह स्वतः हमारी ओर खिंच रहा है।

   राॅन्डा बर्न ने अपनी पुस्तक ’जीम ैमबतमज’ में इसे आकर्षण के नियम द्वारा प्रतिपादित किया है। उनके अनुसार-

   1. आकर्षण का नियम जीवन का महान रहस्य है।

   2. समान चीजें समान चीजों को आकर्षित करती हैं, इसलिए जब आप एक विचार सोचते हैं,तो आप उसी जैसे अन्य विचारों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

   3. विचार चुंबकीय है और हर विचार की एक फ्रीक्वेंसी होती है।जब आपके मन में विचार आते हैं,तो वे ब्रह्माण्ड में पहुँचते हैं और चुंबक की तरह उसी फ्रीक्वेंसी वाली सारी चीजों को आकर्षित करते हैं। हर भेजी गयी चीज स्रोत तक यानी आप तक लौट कर आती है।

   4. आप मानवीय ट्रांसमिशन टाॅवर की तरह हैं और अपने विचारों से फ्रीक्वेंसी प्रसारित कर रहे ंहैं। अगर आप अपनी जिंदगी में कोई चीज बदलना चाहते हैं, तो अपने विचार बदलकर फ्रीक्वेंसी बदल लें।

   5. आपके वर्तमान विचार आपके भावी जीवन का निर्माण कर रहे हैं। आप जिसके बारे में सबसे ज्यादा सोचते हैं या जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान केन्द्रित करते हैं,वह आपकी जिंदगी में प्रकट हो जायेगा।

   6. आपके विचार वस्तु बन जाते हैं।

   उक्त नियम के परिप्रेक्ष्य में यदि हम स्वयं पर विचार करें तो पायेंगे कि हम में से अधिकांश लोग उन चीजों के बारे में अधिक विचार करते हैं, जिन्हें हम नहीं चाहते, कहीं ऐसा न हो कहीं वैसा न हो। उक्त नियम के अनुसार हमारे जीवन में ज्यादातर वही घटित होता है, जिसके बारे में हम अधिक सोचते हैं। अर्थात् अच्छा सोचते हैं तो अच्छा और बुरा सोचते हैं तो बुरा होता है।इसलिए हमें अपने मस्तिष्क में उन चीजों के विचार रखने चाहिए जिन्हें हम चाहते हैं। अतः इस बारे में हमारा दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए कि हमारा लक्ष्य क्या है , हम चाहते क्या हैं?

   हमारे धर्म,दर्शन और साहित्य में भी यह कहा गया है कि अच्छे विचार और दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है। जैसी हमारी भावना होगी, विचार होंगे चीजें उसी रूप में हमारे सामने आयेंगी। तुलसीदास ने कहा भी है-

   जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

   यदि हमारे विचार, हमारी भावनाएँ सकारात्मक हैं तो हम अपने आस-पास एक ऐसा वातावरण बना सकते हैं जो हमारे लिए लक्ष्य प्राप्ति में सहायक हो सकता है।वास्तव में विचार भविष्य की आधारशिला हैं।

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