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वर्ष: 1, अंक 16, जुलाई(प्रथम), 2017



रोज स्कूल जायेंगे

महेंद्र देवांगन


खतम हो गई छुट्टी अब तो, 
रोज स्कूल जायेंगे ।
मम्मी भर दो टिफिन डिब्बा, 
मिल बांटकर खायेंगे ।

नये नये जूता और मोजा, 
नया ड्रेस सिलवायेंगे ।
नई नई कापी और पुस्तक, 
नया बेग बनवायेंगे ।

नये नये सब दोस्त मिलेंगे, 
उनसे हाथ मिलायेंगे ,
नये नये शिक्षक और मैडम 
हमको खूब पढायेंगे ।

नहीं करेंगे अब शैतानी, 
डांट नहीं अब खायेंगे ।
टीचर जी के होमवर्क को ,
पूरा करके जायेंगे ।

मन लगाकर पाठ पढेंगे, 
अपना ज्ञान बढायेंगे ।
काम्पीटेशन के इस युग में, 
अव्वल नंबर लायेंगे ।
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