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वर्ष: 1, अंक 16, जुलाई(प्रथम), 2017



दस एकम दस

डॉ० अनिल चड्डा


दस एकम दस,
दस दूनी बीस,
खुद को समझना मत बच्चो,
किसी से भी उन्नीस ।
 
दस तीए तीस,
दस चौके चालीस,
कभी न करना बेइमानी तुम,
रहना हरदम खालिस ।
 
दस पंजे पचास,
दस छेके साठ,
पढते रहना हरदम बच्चो,
सदाचार के पाठ ।
 
दस सत्ते सत्तर,
दस अट्ठे अस्सी,
जीवन भर तुम खींच के रखना,
चंचल मन की रस्सी ।
 
दस नामे नब्बे,
दस दाये सौ,
मेहनत से है मिलता जो भी,
कभी न देना खो ।
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